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mahabharat 12.231.14: विद्वान पुरुष दो अयनों को मिलाकर एक संवत्सर कहते हैं। वे दो अयन उत्तरायण और दक्षिणायन हैं॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.231.14 
संवत्सरं द्वे त्वयने वदन्ति
संख्याविदो दक्षिणमुत्तरं च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष दो अयनों को मिलाकर एक संवत्सर कहते हैं। वे दो अयन उत्तरायण और दक्षिणायन हैं॥14॥
 
Learned men call two ayanas together as one Samvatsar. Those two ayanas are Uttarayan and Dakshinayan.॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)