Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.231.13: तीस मुहूर्तों से एक दिन-रात बनता है। महर्षियों ने दिन-रात के लिए समान मुहूर्त बताए हैं। तीस दिन-रात मिलकर एक महीना और बारह महीनों से एक संवत्सर बनता है।॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिंशन्मुहूर्तं तु भवेदहश्च
रात्रिश्च संख्या मुनिभि: प्रणीता।
मास: स्मृतो रात्र्यहनी च त्रिंशत्
संवत्सरो द्वादशमास उक्त:॥ १३॥
अनुवाद
तीस मुहूर्तों से एक दिन-रात बनता है। महर्षियों ने दिन-रात के लिए समान मुहूर्त बताए हैं। तीस दिन-रात मिलकर एक महीना और बारह महीनों से एक संवत्सर बनता है।॥13॥
Thirty muhurats make one day and night. The great sages have stated the same number of muhurats for day and night. Thirty days and nights make one month and twelve months make one Samvatsar.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥