Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.231.11: व्यासजी बोले - बेटा ! सृष्टि के आदि में अनादि, अनन्त, अजन्मा, दिव्य, अमर, ध्रुव, अपरिवर्तनशील, अपरिमेय और ज्ञान से परे ब्रह्म रहते हैं ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
अनाद्यन्तमजं दिव्यमजरं ध्रुवमव्ययम्।
अप्रतर्क्यमविज्ञेयं ब्रह्माग्रे सम्प्रवर्तते॥ ११॥
अनुवाद
व्यासजी बोले - बेटा ! सृष्टि के आदि में अनादि, अनन्त, अजन्मा, दिव्य, अमर, ध्रुव, अपरिवर्तनशील, अपरिमेय और ज्ञान से परे ब्रह्म रहते हैं ॥11॥
Vyasji said – Son! In the beginning of the universe, there remains the eternal, infinite, unborn, divine, immortal, polar, unchangeable, irrational and beyond knowledge Brahma. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥