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श्लोक  12.230.9 
तेजसा यशसा बुद्धॺा ज्ञानेन विनयेन च।
जन्मना तपसा वृद्धस्तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
नारदजी तेज, बुद्धि, यश, ज्ञान, विनय, जन्म और तप में अन्य सभी से श्रेष्ठ हैं; इसीलिए उनकी सर्वत्र पूजा होती है।
 
Narada is superior to all others in brilliance, intellect, fame, knowledge, humility, birth and austerity; that is why he is worshipped everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)