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श्लोक  12.230.7 
उपास्यो नारदो बाढं वाचि नास्य व्यतिक्रम:।
कामतो यदि वा लोभात् तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
नारद जी निश्चय ही पूजनीय हैं। वे कभी भी कामना या लोभ से अपना वचन नहीं बदलते, इसीलिए सर्वत्र उनका आदर होता है।
 
Narada is certainly worthy of worship. He never changes his word even out of desire or greed; that is why he is respected everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)