Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.230.24: वह समस्त गुणों से विभूषित है, कार्य में कुशल है, शुद्ध है, रोगरहित है, समय का मूल्य समझता है और परमप्रिय आत्मा को जानता है; फिर कौन उससे प्रेम नहीं करेगा? ॥24॥ | mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं सर्वगुणसम्पन्नं दक्षं शुचिमनामयम्।
कालज्ञं च प्रियज्ञं च क: प्रियं न करिष्यति॥ २४॥
अनुवाद
वह समस्त गुणों से विभूषित है, कार्य में कुशल है, शुद्ध है, रोगरहित है, समय का मूल्य समझता है और परमप्रिय आत्मा को जानता है; फिर कौन उससे प्रेम नहीं करेगा? ॥24॥
He is adorned with all the virtues, efficient in work, pure, disease-free, understands the value of time and knows the most beloved soul; then who will not love him? ॥24॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वासुदेवोग्रसेनसंवादे त्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवादविषयक दो सौ तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥