Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.230.22: नारद जी निर्लज्ज नहीं हैं। वे सदैव दूसरों का हित करने में तत्पर रहते हैं; इसीलिए दूसरे लोग उन्हें अपने कल्याण कार्यों में लगाए रखते हैं और वे कभी किसी का रहस्य प्रकट नहीं करते; इसीलिए उनका सर्वत्र सम्मान होता है ॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारद जी निर्लज्ज नहीं हैं। वे सदैव दूसरों का हित करने में तत्पर रहते हैं; इसीलिए दूसरे लोग उन्हें अपने कल्याण कार्यों में लगाए रखते हैं और वे कभी किसी का रहस्य प्रकट नहीं करते; इसीलिए उनका सर्वत्र सम्मान होता है ॥ 22॥
Narada ji is not shameless. He is always ready to do good for others; that is why other people keep him engaged in their welfare activities and he never reveals anyone's secrets; that is why he is respected everywhere. ॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥