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श्लोक  12.230.20 
नासूयत्यागमं कंचित् स्वनयेनोपजीवति।
अवन्ध्यकालो वश्यात्मा तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वे किसी भी शास्त्र में दोष नहीं ढूँढ़ते। अपने सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीते हैं। वे कभी समय नष्ट नहीं करते और अपने मन को वश में रखते हैं; इसीलिए उनका सर्वत्र सम्मान होता है।
 
They do not find fault in any scripture. They live their life according to their principles. They never waste their time and keep their mind under control; that is why they are respected everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)