Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.230.18: उसका मन कभी विषय-भोगों में नहीं लगता और वह कभी अपनी प्रशंसा नहीं करता। वह कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करता और मधुर वचन बोलता है; इसीलिए वह सर्वत्र आदर पाता है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.230.18 
समाधिर्नास्य कामार्थे नात्मानं स्तौति कर्हिचित्।
अनीर्षुर्मृदुसंवादस्तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसका मन कभी विषय-भोगों में नहीं लगता और वह कभी अपनी प्रशंसा नहीं करता। वह कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करता और मधुर वचन बोलता है; इसीलिए वह सर्वत्र आदर पाता है॥18॥
 
His mind is never set on sensual pleasures and he never praises himself. He is never jealous of anyone and speaks the sweetest words; that is why he is respected everywhere.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)