Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.230.17: वह समस्त प्राणियों में आसक्ति से रहित है; फिर भी आसक्त प्रतीत होता है। उसके मन में दीर्घकाल तक कोई संशय नहीं रहता और वह बहुत अच्छा वक्ता है; इसीलिए उसकी सर्वत्र पूजा होती है॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असक्त: सर्वभूतेषु सक्तात्मेव च लक्ष्यते।
अदीर्घसंशयो वाग्मी तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ १७॥
अनुवाद
वह समस्त प्राणियों में आसक्ति से रहित है; फिर भी आसक्त प्रतीत होता है। उसके मन में दीर्घकाल तक कोई संशय नहीं रहता और वह बहुत अच्छा वक्ता है; इसीलिए उसकी सर्वत्र पूजा होती है॥ 17॥
He is devoid of attachment to all beings; yet he appears to be attached. No doubt remains in his mind for a long time and he is a very good speaker; that is why he is worshipped everywhere.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥