Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.230.15: नारदजी का कभी किसी से धन, अन्य किसी प्रयोजन या कार्य के विषय में झगड़ा हुआ हो, ऐसी बात नहीं है। वे समस्त दोषों से रहित हैं, इसीलिए सर्वत्र उनका आदर होता है ॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नार्थे धने वा कामे वा भूतपूर्वोऽस्य विग्रह:।
दोषाश्चास्य समुच्छिन्नास्तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ १५॥
अनुवाद
नारदजी का कभी किसी से धन, अन्य किसी प्रयोजन या कार्य के विषय में झगड़ा हुआ हो, ऐसी बात नहीं है। वे समस्त दोषों से रहित हैं, इसीलिए सर्वत्र उनका आदर होता है ॥15॥
It is not the case that Naradji has ever had a quarrel with anyone in the matter of money, any other purpose or work. He is devoid of all faults, that is why he is respected everywhere. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥