Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.230.13: वह सबके प्रति समभाव रखता है, इसलिए न तो उसे कोई प्रिय है और न ही कोई अप्रिय। वह अपने मन की बात कहता है, इसलिए उसका सर्वत्र सम्मान होता है॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समत्वाच्च प्रियो नास्ति नाप्रियश्च कथंचन।
मनोऽनुकूलवादी च तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ १३॥
अनुवाद
वह सबके प्रति समभाव रखता है, इसलिए न तो उसे कोई प्रिय है और न ही कोई अप्रिय। वह अपने मन की बात कहता है, इसलिए उसका सर्वत्र सम्मान होता है॥13॥
He is equanimous towards all; therefore no one is dear to him nor is anyone disliked by him. He speaks according to his heart, therefore he is respected everywhere.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥