Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.230.10: वह उत्तम आचरण वाला, सुखपूर्वक शयन करने वाला, शुद्ध अन्न खाने वाला, महान आदर योग्य, पवित्र, अच्छे वचन बोलने वाला और ईर्ष्या रहित है; इसीलिए वह सर्वत्र पूजित है॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.230: श्रीकृष्ण और उग्रसेनका संवाद—नारदजीकी लोकप्रियताके हेतुभूत गुणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुशील: सुखसंवेश: सुभोज: स्वादर: शुचि:।
सुवाक्यश्चाप्यनीर्ष्यश्च तस्मात् सर्वत्र पूजित:॥ १०॥
अनुवाद
वह उत्तम आचरण वाला, सुखपूर्वक शयन करने वाला, शुद्ध अन्न खाने वाला, महान आदर योग्य, पवित्र, अच्छे वचन बोलने वाला और ईर्ष्या रहित है; इसीलिए वह सर्वत्र पूजित है॥10॥
He is well behaved, sleeps comfortably, eats pure food, is worthy of great respect, is holy, speaks good words and is free from jealousy; this is why he is worshipped everywhere.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥