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mahabharat 12.23.5: हे प्रभु! पशु, पक्षी आदि प्राणी भी गृहस्थों द्वारा ही पाले जाते हैं, अतः गृहस्थ ही श्रेष्ठ है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.23.5 
वयांसि पशवश्चैव भूतानि च जनाधिप।
गृहस्थैरेव धार्यन्ते तस्माच्छ्रेष्ठो गृहाश्रमी॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! पशु, पक्षी आदि प्राणी भी गृहस्थों द्वारा ही पाले जाते हैं, अतः गृहस्थ ही श्रेष्ठ है ॥5॥
 
O Lord! Animals, birds and other creatures are also brought up by householders; hence a householder is the best. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)