Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.23.47: हे धर्म को जानने वाले महान आत्मा! अपने भाई की हितकारी सलाह सुनो। राजेन्द्र! दण्ड धारण करना क्षत्रिय धर्म का अंग है, न कि सिर मुंडाकर संन्यासी बनना। 47. | mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भ्रातुरस्य हितं वाक्यं शृणु धर्मज्ञ सत्तम।
दण्ड एव हि राजेन्द्र क्षत्रधर्मो न मुण्डनम्॥ ४७॥
अनुवाद
हे धर्म को जानने वाले महान आत्मा! अपने भाई की हितकारी सलाह सुनो। राजेन्द्र! दण्ड धारण करना क्षत्रिय धर्म का अंग है, न कि सिर मुंडाकर संन्यासी बनना। 47.
O noble soul, who knows the Dharma, listen to your brother's advice which is beneficial. Rajendra! Bearing the staff is the part of the Kshatriya Dharma, not shaving one's head and becoming a Sanyasi. 47.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि व्यासवाक्ये त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें व्यासवाक्यविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥