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mahabharat 12.23.43: तब लिखित ने पूछा - हे महाबली ब्राह्मण! यदि आपकी तपस्या इतनी प्रबल है तो आपने मुझे पहले ही पवित्र क्यों नहीं कर दिया?॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.23.43 
लिखित उवाच
किं तु नाहं त्वया पूत: पूर्वमेव महाद्युते।
यस्य ते तपसो वीर्यमीदृशं द्विजसत्तम॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तब लिखित ने पूछा - हे महाबली ब्राह्मण! यदि आपकी तपस्या इतनी प्रबल है तो आपने मुझे पहले ही पवित्र क्यों नहीं कर दिया?॥ 43॥
 
Then Likhit asked - O mighty Brahmin! If your austerity is so powerful then why did you not purify me earlier?॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)