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mahabharat 12.23.39: अब तुम बहुदा नदी के तट पर जाकर देवताओं, ऋषियों और पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करो और भविष्य में कभी भी अपने मन को पाप की ओर प्रवृत्त मत करो।   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.23.39 
त्वं गत्वा बाहुदां शीघ्रं तर्पयस्व यथाविधि।
देवानृषीन् पितॄंश्चैवं मा चाधर्मे मन: कृथा:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अब तुम बहुदा नदी के तट पर जाकर देवताओं, ऋषियों और पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करो और भविष्य में कभी भी अपने मन को पाप की ओर प्रवृत्त मत करो।
 
Now you should go to the banks of the river Bahuda and offer oblations to the gods, sages and forefathers as per the rituals. In future, never again let your mind be inclined towards sin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)