Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.23.38: शंख ने कहा- धर्मज्ञ! मैं तुमसे क्रोधित नहीं हूँ। तुमने मेरे प्रति कोई अपराध नहीं किया है। ब्रह्मन्! हमारा कुल इस लोक में अत्यन्त पवित्र और निष्कलंक के रूप में विख्यात है। तुमने धर्म का उल्लंघन किया था, इसलिए मैंने उसका प्रायश्चित किया है। 38। | mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शंख उवाच
न कुप्ये तव धर्मज्ञ न त्वं दूषयसे मम।
सुनिर्मलं कुलं ब्रह्मन्नस्मिन् जगति विश्रुतम्।
धर्मस्तु ते व्यतिक्रान्तस्ततस्ते निष्कृति: कृता॥ ३८॥
अनुवाद
शंख ने कहा- धर्मज्ञ! मैं तुमसे क्रोधित नहीं हूँ। तुमने मेरे प्रति कोई अपराध नहीं किया है। ब्रह्मन्! हमारा कुल इस लोक में अत्यन्त पवित्र और निष्कलंक के रूप में विख्यात है। तुमने धर्म का उल्लंघन किया था, इसलिए मैंने उसका प्रायश्चित किया है। 38।
Shankha said-Dharmagya! I am not angry with you. You have not done any crime against me. Brahman! Our family is renowned in this world as very pure and untainted. You had violated the Dharma, hence I have atoned for that. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥