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mahabharat 12.23.31: उनके ऐसा कहने पर लिखित ऋषि ने सुद्युम्न से कहा - 'हे राजन! पहले यह प्रतिज्ञा करो कि 'हम ऐसा करेंगे' और फिर मेरा प्रयोजन सुनो और उसे सुनकर तुरंत पूरा करो।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.23.31 
एवमुक्त: स विप्रर्षि: सुद्युम्नमिदमब्रवीत्।
प्रतिश्रुत्य करिष्येति श्रुत्वा तत् कर्तुमर्हसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर लिखित ऋषि ने सुद्युम्न से कहा - 'हे राजन! पहले यह प्रतिज्ञा करो कि 'हम ऐसा करेंगे' और फिर मेरा प्रयोजन सुनो और उसे सुनकर तुरंत पूरा करो।॥31॥
 
On his saying this, the sage Likhit said to Sudyumna, 'O King! First take this pledge that 'we will do it' and then listen to my purpose and after listening to it, fulfill it immediately.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)