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mahabharat 12.23.30: राजा ने धर्म को जानने वाले ऋषि से मिलकर उनसे पूछा - "भगवन्! आपके शुभ आगमन का क्या प्रयोजन है? कृपया मुझे यह बताएँ और उसे पूर्ण समझिए।" ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.23.30 
तमब्रवीत् समागम्य स राजा धर्मवित्तमम्।
किमागमनमाचक्ष्व भगवन् कृतमेव तत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजा ने धर्म को जानने वाले ऋषि से मिलकर उनसे पूछा - "भगवन्! आपके शुभ आगमन का क्या प्रयोजन है? कृपया मुझे यह बताएँ और उसे पूर्ण समझिए।" ॥30॥
 
The king met the sage who knew the religion and asked him, "Lord! What is the purpose of your auspicious visit? Please tell me this and consider it as accomplished." ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)