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mahabharat 12.23.25: तब शंख ने बड़े क्रोध से कहा, 'मुझसे पूछे बिना तुमने स्वयं ही यह फल ले लिया है।   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.23.25 
तमब्रवीत् तथा शंखस्तीव्ररोषसमन्वित:।
स्तेयं त्वया कृतमिदं फलान्याददता स्वयम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब शंख ने बड़े क्रोध से कहा, 'मुझसे पूछे बिना तुमने स्वयं ही यह फल ले लिया है।
 
Then Shankha said in great anger, 'You have stolen this by taking the fruit yourself without asking me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)