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mahabharat 12.23.19: बहुदा नदी के तट पर उन दोनों के अलग-अलग अत्यन्त सुन्दर आश्रम थे, जो सदैव फल-फूलों से लदे वृक्षों से सुशोभित रहते थे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.23.19 
तयोरावसथावास्तां रमणीयौ पृथक् पृथक्।
नित्यपुष्पफलैर्वृक्षैरुपेतौ बाहुदामनु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
बहुदा नदी के तट पर उन दोनों के अलग-अलग अत्यन्त सुन्दर आश्रम थे, जो सदैव फल-फूलों से लदे वृक्षों से सुशोभित रहते थे॥19॥
 
They both had separate, very beautiful ashrams on the banks of the river Bahuda, which were adorned with trees always laden with fruits and flowers.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)