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mahabharat 12.23.17: युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु ! पृथ्वी के अधिपति सुद्युम्न ने किस कर्म से परम सिद्धि प्राप्त की ? मैं उस राजा का चरित्र सुनना चाहता हूँ ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.23.17 
युधिष्ठिर उवाच
भगवन् कर्मणा केन सुद्युम्नो वसुधाधिप:।
संसिद्धिं परमां प्राप्त: श्रोतुमिच्छामि तं नृपम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु ! पृथ्वी के अधिपति सुद्युम्न ने किस कर्म से परम सिद्धि प्राप्त की ? मैं उस राजा का चरित्र सुनना चाहता हूँ ॥17॥
 
Yudhishthir asked – Lord! By what action did the ruler of the earth, Sudyumna, attain supreme success? I want to hear the character of that king. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)