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mahabharat 12.23.13: हे कुन्तीपुत्र! इनमें भी राजा का मुख्य कर्तव्य दण्ड धारण करना कहा गया है; क्योंकि क्षत्रियों में बल स्थिर रहता है और दण्ड बल में ही स्थित रहता है ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.23.13 
एषां ज्यायस्तु कौन्तेय दण्डधारणमुच्यते।
बलं हि क्षत्रिये नित्यं बले दण्ड: समाहित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! इनमें भी राजा का मुख्य कर्तव्य दण्ड धारण करना कहा गया है; क्योंकि क्षत्रियों में बल स्थिर रहता है और दण्ड बल में ही स्थित रहता है ॥13॥
 
O son of Kunti! Among these also, carrying a stick is said to be the chief duty of a king; because among Kshatriyas strength is a constant state and the stick is established in strength. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)