Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.23.1: वैशम्पायनजी कहते हैं-राजन्! जब निद्राविजेता अर्जुन के ऐसा कहने पर भी कुरुकुलानन्दन पाण्डुपुत्र कुन्तीकुमार युधिष्ठिर कुछ नहीं बोले, तब द्वैपायन व्यासजी ने इस प्रकार कहा। 1॥ | mahabharat अध्याय 12.23: व्यासजीका शंख और लिखितकी कथा सुनाते हुए राजा सुद्युम्नके दण्डधर्मपालनका महत्त्व सुनाकर युधिष्ठिरको राजधर्ममें ही दृढ़ रहनेकी आज्ञा देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं-राजन्! जब निद्राविजेता अर्जुन के ऐसा कहने पर भी कुरुकुलानन्दन पाण्डुपुत्र कुन्तीकुमार युधिष्ठिर कुछ नहीं बोले, तब द्वैपायन व्यासजी ने इस प्रकार कहा। 1॥
Vaishampayanji says – King! When Kurukulanandan Pandu's son Kuntikumar Yudhishthir did not say anything even after Arjuna, the conqueror of sleep, said this, then Dwaipayana Vyasji said thus. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥