Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.229.9: यदि कोई इन बुद्धिमान पुरुषों को कठोर वचन कहता है, तो वे उस कठोर व्यक्ति को कुछ भी नहीं कहते। वे अपने को हानि पहुँचाने वाले का भी भला चाहते हैं और अपने को मारने वाले को भी मारने की इच्छा नहीं रखते।॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उक्ताश्च न वदिष्यन्ति वक्तारमहिते हितम्।
प्रतिहन्तुं न चेच्छन्ति हन्तारं वै मनीषिण:॥ ९॥
अनुवाद
यदि कोई इन बुद्धिमान पुरुषों को कठोर वचन कहता है, तो वे उस कठोर व्यक्ति को कुछ भी नहीं कहते। वे अपने को हानि पहुँचाने वाले का भी भला चाहते हैं और अपने को मारने वाले को भी मारने की इच्छा नहीं रखते।॥9॥
If someone says harsh words to these wise men, they do not say anything in return to that harsh person. They wish well even for the person who harms them and they do not want to kill in return the person who kills them.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥