Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.229.5: देवल ने कहा - मुनिवर ! यदि कोई आपको प्रणाम करता है, तो भी आप प्रसन्न नहीं होते और यदि कोई आपकी निन्दा भी करता है, तो भी आप क्रोधित नहीं होते। यह आपकी कैसी बुद्धि है? यह आपको कहाँ से मिली? और आपकी इस बुद्धि का परम आधार क्या है?॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवल उवाच
न प्रीयसे वन्द्यमानो निन्द्यमानो न कुप्यसे।
का ते प्रज्ञा कुतश्चैषा किं ते तस्या: परायणम्॥ ५॥
अनुवाद
देवल ने कहा - मुनिवर ! यदि कोई आपको प्रणाम करता है, तो भी आप प्रसन्न नहीं होते और यदि कोई आपकी निन्दा भी करता है, तो भी आप क्रोधित नहीं होते। यह आपकी कैसी बुद्धि है? यह आपको कहाँ से मिली? और आपकी इस बुद्धि का परम आधार क्या है?॥5॥
Deval said - Munivar! If someone bows down to you, you are not very happy and even if someone criticizes you, you do not get angry. What kind of wisdom is this of yours? From where did you get it? And what is the ultimate support of this wisdom of yours?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥