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mahabharat 12.229.4: एक बार असितदेवल ने समस्त धर्मों को जानने वाले, शास्त्रों के विद्वान, परम ज्ञानी तथा क्रोध और हर्ष से रहित जैगीषव्य ऋषि से इस प्रकार पूछा ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.229.4 
जैगीषव्यं महाप्रज्ञं धर्माणामागतागमम्।
अक्रुध्यन्तमहृष्यन्तमसितो देवलोऽब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
एक बार असितदेवल ने समस्त धर्मों को जानने वाले, शास्त्रों के विद्वान, परम ज्ञानी तथा क्रोध और हर्ष से रहित जैगीषव्य ऋषि से इस प्रकार पूछा ॥4॥
 
Once Asita-Deval asked the sage Jaigishavya, who knew all the religions, was a scholar of scriptures, was of immense knowledge and was free from anger and joy, in this manner. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)