Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.229.25: न देवता, न गंधर्व, न भूत और न ही राक्षस उस ज्ञानी महात्मा के पदचिन्हों का अनुसरण कर सकते हैं, जो परम मोक्ष को प्राप्त हो गया है। | mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नास्य देवा न गन्धर्वा न पिशाचा न राक्षसा:।
पदमन्ववरोहन्ति प्राप्तस्य परमां गतिम्॥ २५॥
अनुवाद
न देवता, न गंधर्व, न भूत और न ही राक्षस उस ज्ञानी महात्मा के पदचिन्हों का अनुसरण कर सकते हैं, जो परम मोक्ष को प्राप्त हो गया है।
Neither gods nor Gandharvas, nor ghosts nor devils can follow the steps of that wise great soul who has attained the supreme salvation. 25.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि जैगीषव्यासितसंवादे एकोनत्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जैगीषव्य और असित-देवलसंवादविषयक दो सौ उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥