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mahabharat 12.229.17: न तो उनका कोई शत्रु होता है और न वे किसी के शत्रु होते हैं। ऐसा करने वाले मनुष्य सदैव सुखी जीवन जीते हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.229.17 
अमित्राश्च न सन्त्येषां ये चामित्रा न कस्यचित् ।
य एवं कुर्वते मर्त्या: सुखं जीवन्ति सर्वदा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
न तो उनका कोई शत्रु होता है और न वे किसी के शत्रु होते हैं। ऐसा करने वाले मनुष्य सदैव सुखी जीवन जीते हैं ॥17॥
 
Neither do they have any enemies nor are they the enemies of anyone. People who do this always live a happy life. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)