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mahabharat 12.229.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! किस प्रकार के शील, किस प्रकार के आचरण, किस प्रकार के ज्ञान और किस प्रकार के पराक्रम को धारण करके मनुष्य प्रकृति से परे ब्रह्म के अविनाशी पद को प्राप्त होता है? 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.229.1 
युधिष्ठिर उवाच
किंशील: किंसमाचार: किंविद्य: किंपराक्रम:।
प्राप्नोति ब्रह्मण: स्थानं यत्परं प्रकृतेर्ध्रुवम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! किस प्रकार के शील, किस प्रकार के आचरण, किस प्रकार के ज्ञान और किस प्रकार के पराक्रम को धारण करके मनुष्य प्रकृति से परे ब्रह्म के अविनाशी पद को प्राप्त होता है? 1॥
 
Yudhishthir asked – Grandfather! By possessing what kind of modesty, what kind of conduct, what kind of knowledge and what kind of bravery, a man attains the imperishable state of Brahma beyond nature? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)