हे कुरुश्रेष्ठ युधिष्ठिर! अभ्युदय-परभव के जिन लक्षणों के विषय में तुमने पूछा था, वही मैंने आज तुम्हें यह उत्तम उदाहरण देकर बताया है। तुम भली-भाँति विचार करके इसकी प्रामाणिकता का निश्चय करो। 96॥
Yudhishthir, the best of Kurus! The symptoms of Abhyudaya-Parabhava that you had asked about, I have told you today by giving this excellent example. You should think carefully and decide its authenticity. 96॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि श्री-वासवसंवादो नाम अष्टाविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें लक्ष्मी और इन्द्रका संवादनामक दो सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)