Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.228.94: उन दिनों अकाल मृत्यु की तो बात ही छोड़ो, तेज हवा से वृक्ष हिलने पर भी फूल भी वृक्षों से अकाल नहीं गिरते थे। फिर फल कैसे गिरेंगे? सभी गौएँ दूध और अन्य रस देती थीं। इच्छानुसार दूध देती थीं। किसी के मुख से कभी कोई कटु वचन नहीं निकलता था॥ 94॥ | mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न जात्वकाले कुसुमं कुत: फलं
पपात वृक्षात् पवनेरितादपि।
रसप्रदा: कामदुघाश्च धेनवो
न दारुणा वाग् विचचार कस्यचित् ॥ ९४॥
अनुवाद
उन दिनों अकाल मृत्यु की तो बात ही छोड़ो, तेज हवा से वृक्ष हिलने पर भी फूल भी वृक्षों से अकाल नहीं गिरते थे। फिर फल कैसे गिरेंगे? सभी गौएँ दूध और अन्य रस देती थीं। इच्छानुसार दूध देती थीं। किसी के मुख से कभी कोई कटु वचन नहीं निकलता था॥ 94॥
Forget about untimely death in those days, even flowers would not fall from trees untimely even if the trees were shaken by strong winds. Then how would fruits fall? All the cows gave milk and other juices. They gave milk as per the wish. No harsh words ever came out of anyone's mouth.॥ 94॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥