Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.228.93: उस समय पुण्यात्मा मनुष्यों के शुभ मार्ग पर स्थित मनस्वी मनुष्य अपने शुभ कर्मों द्वारा परम सौन्दर्य को प्राप्त करने लगे तथा देवता, किन्नर, यक्ष, राक्षस और मनुष्य समृद्ध एवं उदार हो गए ॥93॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  12.228.93 
क्रियाभिरामा मनुजा मनस्विनो
बभु: शुभे पुण्यकृतां पथि स्थिता:।
नरामरा: किन्नरयक्षराक्षसा:
समृद्धिमन्त: सुमनस्विनोऽभवन्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
उस समय पुण्यात्मा मनुष्यों के शुभ मार्ग पर स्थित मनस्वी मनुष्य अपने शुभ कर्मों द्वारा परम सौन्दर्य को प्राप्त करने लगे तथा देवता, किन्नर, यक्ष, राक्षस और मनुष्य समृद्ध एवं उदार हो गए ॥93॥
 
At that time, the mind-wielding human beings, situated on the auspicious path of virtuous people, started attaining supreme beauty through their good deeds and gods, eunuchs, yakshas, ​​demons and humans became prosperous and generous. 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)