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mahabharat 12.228.92: जब देवी लक्ष्मी स्वर्ग में आईं, तब इंद्रदेव ने संसार में उगने वाली फसलों की सिंचाई के लिए ऋतुनुसार वर्षा आरम्भ कर दी। कोई भी धर्म के मार्ग से विचलित न हो और अनेक समुद्रों से सुशोभित पृथ्वी उन समुद्रों की गर्जना के रूप में त्रिभुवनवासियों की विजय का सुन्दर उद्घोष करने लगी।॥92॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  12.228.92 
यथर्तु सस्येषु ववर्ष वासवो
न धर्ममार्गाद् विचचाल कश्चन।
अनेकरत्नाकरभूषणा च भू:
सुघोषघोषा भुवनौकसां जये॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
जब देवी लक्ष्मी स्वर्ग में आईं, तब इंद्रदेव ने संसार में उगने वाली फसलों की सिंचाई के लिए ऋतुनुसार वर्षा आरम्भ कर दी। कोई भी धर्म के मार्ग से विचलित न हो और अनेक समुद्रों से सुशोभित पृथ्वी उन समुद्रों की गर्जना के रूप में त्रिभुवनवासियों की विजय का सुन्दर उद्घोष करने लगी।॥92॥
 
When Goddess Lakshmi arrived in heaven, Lord Indra started raining seasonally to irrigate the crops grown in the world. No one deviated from the path of religion and the earth adorned with many oceans started making beautiful proclamations of victory of the inhabitants of Tribhuvan in the form of the roar of those oceans.॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)