श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 79-80h
 
 
श्लोक  12.228.79-80h 
कृतघ्ना नास्तिका: पापा गुरुदाराभिमर्शिन:॥ ७९॥
अभक्ष्यभक्षणरता निर्मर्यादा हतत्विष:।
 
 
अनुवाद
राक्षस लोग कृतघ्न, नास्तिक, पापी और व्यभिचारी हो गए हैं। वे अभक्ष्य पदार्थों को भी खाते हैं, धर्म की मर्यादा को तोड़कर मनमाना आचरण करते हैं। इसीलिए वे तेजस्वी हो गए हैं। 79 1/2॥
 
The demons have become ungrateful, atheistic, sinful and adulterous. They also eat things which should not be eaten and break the limits of religion and behave arbitrarily. That is why they have become lustrous. 79 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)