श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 76-77h
 
 
श्लोक  12.228.76-77h 
श्वश्रूश्वशुरयोरग्रे वधू: प्रेष्यानशासत॥ ७६॥
अन्वशासच्च भर्तारं समाहूयाभिजल्पति।
 
 
अनुवाद
सास-ससुर के सामने बहू नौकरों पर हुक्म चलाने लगी है। यहाँ तक कि वह अपने पति को भी हुक्म देती है और सबके सामने बुलाकर उससे बातें करती है।
 
In front of her mother-in-law and father-in-law, the daughter-in-law has started ruling over the servants. She even orders her husband and calls him in front of everyone and talks to him. 76 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)