श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  12.228.72 
अधीयतेऽव्रता: केचिद् वृथा व्रतमथापरे॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किए बिना ही वेदों का अध्ययन करते हैं; कुछ लोग व्यर्थ (अवैदिक) व्रतों का पालन करते हैं। 72.
 
Some people study the Vedas without observing the vow of celibacy; some people perform useless (non-Vedic) vows. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)