श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  12.228.67-68h 
हारमाभरणं वेषं गतं स्थितमवेक्षितम्॥ ६७॥
असेवन्त भुजिष्या वै दुर्जनाचरितं विधिम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ की दासियाँ सुन्दर हार और अन्य आभूषण पहनकर सुन्दर वस्त्र धारण करती हैं और दुष्ट स्त्रियों की भाँति चलती, खड़ी और व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ करती हैं। वे दुष्ट लोगों द्वारा किये जाने वाले दुष्कर्मों को भी अपना लेती हैं।
 
The maids there wear beautiful necklaces and other ornaments and wear beautiful attire and walk, stand and make sarcastic remarks like wicked women. They also adopt the evil deeds which are committed by wicked people. 67 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)