श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  12.228.64 
उत्सूर्यशायिनश्चासन् सर्वे चासन् प्रगेनिशा:।
अवर्तन् कलहाश्चात्र दिवारात्रं गृहे गृहे॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
अब वे सूर्योदय तक सोने लगे हैं। वे सुबह को ही रात समझते हैं। उनके घरों में दिन-रात कलह-कलेश रहता है। 64.
 
Now they have started sleeping till sunrise. They consider the morning as night. There is strife in their homes day and night. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)