श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  12.228.61 
प्राकारागारविध्वंसान्न स्म ते प्रतिकुर्वते।
नाद्रियन्ते पशून् बद्‍ध्वा यवसेनोदकेन च॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
उनके गाँवों और नगरों की दीवारें और घर गिर जाते हैं, परन्तु वे उनकी मरम्मत नहीं करते। राक्षस अपने पशुओं को घरों में बाँधते हैं, परन्तु उन्हें चारा-पानी देकर उनकी देखभाल नहीं करते।
 
The walls and houses of their villages and cities fall down; but they do not repair them. The demons tie their animals inside their houses, but do not take care of them by giving them fodder and water. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)