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mahabharat 12.228.58: राक्षस और उनके रसोइये मन, वाणी और कर्म से पवित्रता के नियमों का पालन नहीं करते। उनका भोजन खुला ही छोड़ दिया जाता है ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.228.58 
न शौचमनुरुद्धॺन्त तेषां सूदजनास्तथा।
मनसा कर्मणा वाचा भक्ष्यमासीदनावृतम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
राक्षस और उनके रसोइये मन, वाणी और कर्म से पवित्रता के नियमों का पालन नहीं करते। उनका भोजन खुला ही छोड़ दिया जाता है ॥58॥
 
The demons and their cooks do not follow the rules of cleanliness by thought, speech and action. Their food is left uncovered. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)