श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  12.228.57 
भिक्षां बलिमदत्त्वा च स्वयमन्नानि भुञ्जते।
अनिष्ट्वाऽसंविभज्याथ पितृदेवातिथीन् गुरून्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
देवताओं, पितरों, वृध्दों और अतिथियों का पूजन किए बिना, उन्हें भोजन कराए बिना, दान दिए बिना तथा बलिवैश्वदेव का अनुष्ठान किए बिना ही राक्षस स्वयं ही अपना भोजन करते हैं ॥57॥
 
Without worshipping the gods, forefathers, elders and guests and without offering food to them, without giving alms and without performing the rituals of Balivaishvadeva, the demons themselves eat their food. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)