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mahabharat 12.228.54: जिन्होंने धर्म के विरुद्ध निन्दनीय कर्म करके बहुत धन अर्जित किया है, उनकी उसी प्रकार और अधिक धन कमाने की इच्छा बढ़ गई है ॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.228.54 
तथा धर्मादपेतेन कर्मणा गर्हितेन ये।
महत: प्राप्नुवन्त्यर्थांस्तेषां तत्राभवत् स्पृहा॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने धर्म के विरुद्ध निन्दनीय कर्म करके बहुत धन अर्जित किया है, उनकी उसी प्रकार और अधिक धन कमाने की इच्छा बढ़ गई है ॥ 54॥
 
Those who have acquired great wealth by doing condemnable acts contrary to Dharma, their desire to earn more money in the same way has increased. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)