श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.228.50 
तत: कालविपर्यासे तेषां गुणविपर्ययात्।
अपश्यं निर्गतं धर्मं कामक्रोधवशात्मनाम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु समय के साथ उनके गुण बदल गए। मैंने देखा कि राक्षसगण अपना सारा धर्म खो चुके थे। वे काम और क्रोध से ग्रस्त हो गए थे ॥50॥
 
But with the passage of time their qualities changed. I saw that the demons had lost all their Dharma. They were overcome by lust and anger. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)