Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.228.49: इस प्रकार मैं सृष्टि के आरंभ से लेकर अब तक अनेक युगों से उत्तम गुणों से संपन्न राक्षसों के साथ रह रहा हूँ ॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.228.49 
साहमेवंगुणेष्वेव दानवेष्ववसं पुरा।
प्रजासर्गमुपादाय नैकं युगविपर्ययम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैं सृष्टि के आरंभ से लेकर अब तक अनेक युगों से उत्तम गुणों से संपन्न राक्षसों के साथ रह रहा हूँ ॥ 49॥
 
In this manner I have been living with demons endowed with excellent qualities for several ages, from the time of creation till now. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)