नैकेऽश्नन्ति सुसम्पन्नं न गच्छन्ति परस्त्रियम्।
सर्वभूतेष्ववर्तन्त यथाऽऽत्मनि दयां प्रति॥ ४४॥
अनुवाद
वे कभी भी अकेले उत्तम भोजन नहीं करते थे । पहले दूसरों को देते थे और फिर स्वयं खाते थे । वे कभी किसी दूसरे की स्त्री से सम्बन्ध नहीं रखते थे । वे सभी प्राणियों को अपना ही मानते थे और उन पर दया करते थे ॥ 44॥
He never used to eat good food alone. He used to first give it to others and then consume it himself. He never had relations with another's wife. He treated all creatures as his own and had compassion on them. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)