श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.228.42 
धर्ममेवान्ववर्तन्त न हिंसन्ति परस्परम्।
अनुकूलाश्च कार्येषु गुरुवृद्धोपसेविन:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वे केवल धर्म का पालन करते थे। वे एक-दूसरे को हानि नहीं पहुँचाते थे। वे सभी कार्यों में एक-दूसरे के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार करते थे और अपने गुरुजनों तथा बड़ों की सेवा में तत्पर रहते थे। 42.
 
They followed the religion only. They did not harm each other. They were friendly with each other in all tasks and were devoted to serving their teachers and elders. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)