श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.228.40 
कृपणानाथवृद्धानां दुर्बलातुरयोषिताम्।
दयां च संविभागं च नित्यमेवान्वमोदताम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वे कंजूसों, अनाथों, वृद्धों, दुर्बलों, रोगियों और स्त्रियों पर दया करते थे और उन्हें अन्न-वस्त्र वितरित करते थे। वे इस कार्य को सदैव स्वीकार करते थे ॥40॥
 
He showed mercy to the miser, orphans, the aged, the weak, the sick and women and distributed food and clothes to them. He always approved of this act. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)