Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.228.39: वह सदैव धार्मिक चर्चाओं में लीन रहते थे और दान-दक्षिणा स्वीकार करने से दूर रहते थे। वह रात में केवल आधी नींद ही लेते थे और दिन में नहीं सोते थे। 39. | mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सदा हि वदतां धर्मं सदा चाप्रतिगृह्णताम्।
अर्धं च रात्र्या: स्वपतां दिवा चास्वपतां तथा॥ ३९॥
अनुवाद
वह सदैव धार्मिक चर्चाओं में लीन रहते थे और दान-दक्षिणा स्वीकार करने से दूर रहते थे। वह रात में केवल आधी नींद ही लेते थे और दिन में नहीं सोते थे। 39.
He was always engaged in religious discussions and stayed away from accepting gifts. He used to sleep only for half of the night and did not sleep during the day. 39.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥